सुबह-सुबह दरवाजा खोलते ही
उड़ेल दी सूरज ने मुझ पे रौशनी !!
प्यार से ठोकी धूप ने मेरी पीठ और कहा
चल पड़ - दिन निकल आया है !!
साथी की तरह हौले-हौले
मेरे कानों में स्वर लहरी घोलती
साथ में बह चली मंद हवा !!
लौटते में रात बहुत हो चली थी
तभी तो चाँद घर तक छोड़ने चला आया !!
सच्चे साथी ही ज़िन्दगी की वजह हैं !!
