Thursday, December 10, 2015

सर्दियों की कुनकुनी धूप :)
सहला कर जगाती फूलों को
अपनी गरमाहट से ।

इस धूप से पिघल कर
हटती जाती रात की शीत
और ओस धुले फूल-पौधे
चमक उठते ।

पंछियों की चहचहाहट
सुरीला स्वागत करती है
इस धूप का ।

कुछ ही देर में
तितलियाँ भी उतर आतीं
इस संगीत पर
अपना नृत्य दिखाने ।

प्रकृति बेजोड़ है :)

Thursday, November 5, 2015

आसमान देश

आसमान देश में
बसते हैं बादल बाशिंदे
पल भर को भी एक जगह टिकते नहीं !!

लगते हैं जैसे हो बंजारों की टोली
कुछ अपनी धुन में मदमस्त
तो कुछ को है मेले में पहुँचने की जल्दी !!

उकेरते हैं सुबह से शाम
एक जादू - नगरी,
देखते ही देखते आँखों के सामने
बनते जाते हैं -
घोड़े - हाथी, गुच्छेदार पौधे, झबरीले कुत्ते
और कुछ ही पलों में घुल जाते हैं आसमान में !!

तैरते दिखते हैं जब नीले आसमान में
ये रुई से नरम मुलायम गद्दे,
तो सोचती हूँ
इन पर लेट कर
आसमान देश घूम आऊँ !!





Friday, September 18, 2015

जब ताका मैंने चाँद को
अपनी अंतहीन गहराइयों से,
तो पाया उसे भी ताकते
अपनी असीम ऊँचाइयों से ।

पुराने साथी का अहसास हुअा -

अंतर्मन में तोड़-फोड़ करते
अनर्गल प्रलाप विलीन हो गये,
तन्हा अंधेरों को रौशन कर दिया
उसकी स्नेहिल मुस्कान ने ।

Monday, August 24, 2015

साँस घुट कर रह गई
सोच के भार तले
कहाँ के लिये निकले थे
घुमावों की भटकन
ले आई कहाँ !

शब्द अटक गये हैं
जैसे मकड़ जाल में
कुछ ने दम तोड़ दिया...छटपटाते !
कुछ सरक गये हैं
हाथों से रेत की तरह !!

Tuesday, February 2, 2010

कल रात हौले से

ठंडी हवा लग गयी गले

बड़े करीबी दोस्त की तरह !!

उसके स्पर्श ने दी ठंडक

मेरी सुलगती चुभन को

बांहें फैलाए

चमकीली रेत से सफ़ेद बादल

कुछ दूर यूँ ही साथ चलने को कह रहे थे

मुझे हिचकता देख

चाँद आ बैठा सामने

उसकी मुस्कान.......

सारे तर्क धरे रह गए !!!!!

Friday, January 29, 2010

सुबह-सुबह

सूरज की रौशनी से

कमरे के मटमैले पर्दे भी हो उठे जीवंत !!

चमकने लगे धूल के कण

कमरे में तैरते हुए -

गति में स्थिरता का एहसास दिलाते हुए !!!

मैंने बढ़ाये अपने हाथ

ओर सुनहरी ज़िन्दगी ने मुझे ले लिया

अपने आगोश में !!!!

Tuesday, January 12, 2010

मन है ज्यों

लबालब नदी ,

जीवन की ऊष्मा से तरल ,

झिलमिल करती आशा से !!

मन है ज्यों

मेघ आच्छादित आकाश,

उमड़- घुमड़ कर बरसाने को आतुर ,

नेह भरी बूँदें !!

मन है ज्यों

रंग-बिरंगी तितलियाँ ,

सुन्दर हैं क्षणिक ,

पर शाश्वत हैं उल्लासित !!

मन है ज्यों

अनछुए श्वेत बादल ,

अंतहीन व्योम में तैरते,

सब बेड़ियों से पार !!

मन है ज्यों

तारों भरी रात में ,

लुका-छिपी खेलते सपने,

लम्बी छलांगें लगाते ,

एक से दूसरे सितारे पर !!