Saturday, October 29, 2022

        

मेरा सफ़र 

बहुत आँख मली
पानी से धोई भी बहुत
पर फ्यूज़ हो गया
बल्ब एक -
लपझप करते एक दिन !


शब्दों की क़तार
सहानुभूति जताने का
मक़सद कहके.....

अबूझ रही  
सक्षम लोगों के समक्ष भी 
बस कुछ मलहम और दवा के
फाहों से बना अस्थाई काम ।

दुबारा दस्तक दी 
उसी अस्वस्थता ने
और वही बल्ब फयूज़ हो गया
फिर से !!

शुरु हुई वहाँ से
एक लंबी क़वायद
घर से हॉस्पिटल
और हॉस्पिटल से घर की ......
इन गुज़रते सालों में नौ हमले - 
हर हमला जैसे
एक ग़ुस्सैल झुंड, 
जिसने अस्थिर कर दिये
घर के स्तंभ !!!

मरम्मत आसान न थी
पर कराई हर बार ।

छूट गये फिर भी
कुछ दरारों के निशान .....
जंग का कुछ हर्ज़ाना
तो भरना पड़ता है न ।

अंधेरी सुरंग में
रौशनी दिखी कुछ शब्दों से
इन शब्दों ने मिलवाया ,
एक मार्गदर्शक से 
जिसने दिखाया रास्ता ....
उस गढ्ढे से बाहर आने का
और सिखाया
जीने का स्वस्थ तरीक़ा :)

जंग जारी रहेगी -
बदल गया है
बस उससे जूझने का तरीक़ा
जो है बेहद कारगर !!

आज शक्ति और दम है मुझमें ...
पूर्ण विश्वास भी
कि मैं अब
ख़ैरियत से हूँ !!

Monday, July 4, 2022

 बादलों की छत तले

बूँदों की ओढ़नी 

और फुहारों का बिछौना ।

पुरवाईयों के पंखे

सर-सर, फ़र-फ़र .....

तपिश बह चली है 

बहते पानी के साथ,

रग-रग में भरती जा रही है 

ठंडक और सुकून ।

सराबोर हुआ जा रहा है मन

प्रकृति की इस प्यार भरी छुवन से ।

 ढाँप लेते हैं बादल मुझे 

हिफ़ाज़त से -

एक संरक्षक की तरह,

उनमें बहती जा रही हूँ मैं 

क्षितिज के उस ओर,

धुलते जा रहे हैं सब ओर-छोर

देते हैं तपते मन को ठंडक - 

उन्हीं से बाँट लेती हूँ 

आँखों से बरसते मन के उदगार ।


Saturday, May 28, 2022

बारिश के बाद

 साफ़ नीला आसमान,

सफ़ेद बादलों के चाँदी वर्क में लिपटा 

धूप छन के आती जिनसे, 

गर्माहट देती गीली मिट्टी को

और मुलायम छुवन से 

उठा देती है हर गीले पौधे का सिर -

जो पूरे दिन और रात की पुरज़ोर बारिश से 

सहम कर सिमट गया था अपने में !

यूँ लगा मुझे 

ज्यों हर पौधा  धुल कर चमका 

फिर ख़ुशी में लहका !!!


Thursday, December 9, 2021

 झांकते हुए चाँद ने 

छेड़ी कुछ ऐसी बातें कि

ठंडी हवा से तरंगित

शाख़ों की पत्तियाँ 

हंसते-हंसते हो गयीं

धानी से सुर्ख़ ....

और चाँदनी ने छिटककर 

कर दिया पूरा माहौल 

चमकीला.....ख़ुशनुमा !!!



Sunday, December 5, 2021

 दिन की सुनहरी आभा

लोप होती हुई 

श्यामल विस्तार में,

फिर तारों भरी रात का

सूर्योदय के साथ विदा ले लेना -

अनगिनत आयामों में से 

ये एक  आयाम 

दिखाता है मुझे 

प्रकृति के विभिन्न आयामों के 

सहज जुड़ाव का सुंदर स्वरूप,

और सिखाता है मुझे 

कि बहाव ही ज़िंदगी है, जड़ता नहीं ।



Monday, November 22, 2021

 साफ़ हो गया रास्ता यों

धुल गया ज्यों 

बेबाक़ बरसात में 

और 

मौन कमरे में 

धमाचौकड़ी करते शब्द 

निकल आए हैं 

पन्नों के दालान में खेलने !!