Friday, January 29, 2010

सुबह-सुबह

सूरज की रौशनी से

कमरे के मटमैले पर्दे भी हो उठे जीवंत !!

चमकने लगे धूल के कण

कमरे में तैरते हुए -

गति में स्थिरता का एहसास दिलाते हुए !!!

मैंने बढ़ाये अपने हाथ

ओर सुनहरी ज़िन्दगी ने मुझे ले लिया

अपने आगोश में !!!!

Tuesday, January 12, 2010

मन है ज्यों

लबालब नदी ,

जीवन की ऊष्मा से तरल ,

झिलमिल करती आशा से !!

मन है ज्यों

मेघ आच्छादित आकाश,

उमड़- घुमड़ कर बरसाने को आतुर ,

नेह भरी बूँदें !!

मन है ज्यों

रंग-बिरंगी तितलियाँ ,

सुन्दर हैं क्षणिक ,

पर शाश्वत हैं उल्लासित !!

मन है ज्यों

अनछुए श्वेत बादल ,

अंतहीन व्योम में तैरते,

सब बेड़ियों से पार !!

मन है ज्यों

तारों भरी रात में ,

लुका-छिपी खेलते सपने,

लम्बी छलांगें लगाते ,

एक से दूसरे सितारे पर !!

Wednesday, November 4, 2009

देखा जो झांकती हुई किरणों को

कालिमा लदे बादलों के पीछे से ,

भेदती हुई निकलती आती रौशनी

तरलता भरती जा रही थी मुझमें ,

अँधेरा तो तभी तक है

जब तक रौशनी नहीं -

कोई पुरानी-सी , सीखी हुई बात तैर गई ज़हन में

और दिन हो गया उस पल !!!

Thursday, September 17, 2009

धागा है यह प्रेम का ,

नाज़ुक पर कमज़ोर नहीं !!

ऊंची-ऊंची हैं चट्टानें ,

पर झरना है - रुकता तो नहीं !!

उम्मीदों का दामन पकड़ा ,

हँसना है रोना तो नहीं !!

रोना ,गिरना ,थमना, रुकना ,

पड़ाव हैं ये ठहराव नहीं !!

जीवन हमको रोज़ सिखाता ,

परखता तो है पर दोस्त यही !!

Saturday, September 5, 2009

दिन ने खोली,

अपनी झोली -

लगा बाँटने बेरोकटोक !!

भर-भर बांटे

रौशन कोने ,

चमचमाते छत- गलियारे

और दमकते घर-चौबारे !!!

दिए चिड़ियों को ,

सिंके हुए दाने

और तितलियों को

फूल खोल के !!!!

दे दिया आगाज़ मुझे

और भर दिया मुझमे दम-ख़म;

रख कर सर पर

स्नेह की गर्माहट भरा हाथ !!!

Thursday, August 27, 2009

पाषाण टूटे ,

झरने फूटे

हो गया मन तरल !

सूखी क्यारियाँ ,

भर गयीं फूलों से

खुशबू और रंगों की है चहल-पहल !

पथरीले रास्तों पे ,

उग आई है मुलायम दूब

ज़िन्दगी ने की है पहल !

सवालों को नहीं रही ,

जवाबों की तलब

नए आयाम में आई हूँ मैं टहल !

Monday, August 10, 2009

बह चले पत्ते ,

उड़ चला मन -

कहीं भी, कैसे भी !!

घिरती आ रही बदली

भरती जा रही अन्तर में ,

गीली मिट्टी का सोंधा एहसास -

जैसे प्यार की छुअन पोर-पोर में !!

मदमस्त झोंकों से लहराते पेड़ ,

कोयल की कूक से गूंजता आसमान !!

चित्त हो गया पंख सा हल्का ,

जो भर ली अपने अन्दर

ऐसी सुखद शाम !!!!