Thursday, November 5, 2015
आसमान देश
आसमान देश में
बसते हैं बादल बाशिंदे
पल भर को भी एक जगह टिकते नहीं !!
लगते हैं जैसे हो बंजारों की टोली
कुछ अपनी धुन में मदमस्त
तो कुछ को है मेले में पहुँचने की जल्दी !!
उकेरते हैं सुबह से शाम
एक जादू - नगरी,
देखते ही देखते आँखों के सामने
बनते जाते हैं -
घोड़े - हाथी, गुच्छेदार पौधे, झबरीले कुत्ते
और कुछ ही पलों में घुल जाते हैं आसमान में !!
तैरते दिखते हैं जब नीले आसमान में
ये रुई से नरम मुलायम गद्दे,
तो सोचती हूँ
इन पर लेट कर
आसमान देश घूम आऊँ !!
बसते हैं बादल बाशिंदे
पल भर को भी एक जगह टिकते नहीं !!
लगते हैं जैसे हो बंजारों की टोली
कुछ अपनी धुन में मदमस्त
तो कुछ को है मेले में पहुँचने की जल्दी !!
उकेरते हैं सुबह से शाम
एक जादू - नगरी,
देखते ही देखते आँखों के सामने
बनते जाते हैं -
घोड़े - हाथी, गुच्छेदार पौधे, झबरीले कुत्ते
और कुछ ही पलों में घुल जाते हैं आसमान में !!
तैरते दिखते हैं जब नीले आसमान में
ये रुई से नरम मुलायम गद्दे,
तो सोचती हूँ
इन पर लेट कर
आसमान देश घूम आऊँ !!
Friday, September 18, 2015
Monday, August 24, 2015
Tuesday, February 2, 2010
Friday, January 29, 2010
Tuesday, January 12, 2010
मन है ज्यों
लबालब नदी ,
जीवन की ऊष्मा से तरल ,
झिलमिल करती आशा से !!
मन है ज्यों
मेघ आच्छादित आकाश,
उमड़- घुमड़ कर बरसाने को आतुर ,
नेह भरी बूँदें !!
मन है ज्यों
रंग-बिरंगी तितलियाँ ,
सुन्दर हैं क्षणिक ,
पर शाश्वत हैं उल्लासित !!
मन है ज्यों
अनछुए श्वेत बादल ,
अंतहीन व्योम में तैरते,
सब बेड़ियों से पार !!
मन है ज्यों
तारों भरी रात में ,
लुका-छिपी खेलते सपने,
लम्बी छलांगें लगाते ,
एक से दूसरे सितारे पर !!
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