शाम को छत पर पहुँची

तो देखा -
वो मस्तमौला चितेरा
इन्द्रधनुष को आधा-अधूरा छोड़ कर
जाने कहाँ चला गया था !!
कोयल बेतहाशा कूके जाए उसे बुलाने को
पंछियों के झुंड ढूंढें इधर से उधर !!
मैंने भी देखा चारों ओर -
पर वो दूर ढलते सूरज के साथ जा चुका था
सबकी पंहुच से बाहर -
आख़िर है तो वो मालिक !!!!