Thursday, June 18, 2009

सुबह-सुबह दरवाजा खोलते ही

उड़ेल दी सूरज ने मुझ पे रौशनी !!

प्यार से ठोकी धूप ने मेरी पीठ और कहा

चल पड़ - दिन निकल आया है !!

साथी की तरह हौले-हौले

मेरे कानों में स्वर लहरी घोलती

साथ में बह चली मंद हवा !!

लौटते में रात बहुत हो चली थी

तभी तो चाँद घर तक छोड़ने चला आया !!

सच्चे साथी ही ज़िन्दगी की वजह हैं !!

4 comments:

‘नज़र’ said...

सुबह सी ताज़ा-तरीन कविता

rohit said...

chand aapke saath tha. tabhi kahu kaha chalya gaya .... kher koi baat nahi ..... milega to poochuga....

chaand or suraj ho saath to har sahar me har gaao me koi ekla nahi rah sakta .....chand alfza baat badi...

badia kavita.

rohit

''ANYONAASTI '' {अन्योनास्ति} said...

बहुत खूब यूँही ज़िन्दगी के नगमे सुनती-सुनाती रहना ---

जो जिंदगी से दोस्ती कर ली ,
आयेंगे द्वारे सूरज चाँद सितारे,
तेरे ही इर्द-गिर्द चांदनी भी नाचेगी '
हवाएं भी तेरे नाम के नगमें गायेंगी ,

दिगम्बर नासवा said...

Bashoot khoob ANYONAASTI ji se aapke blog ka paricha milaa aur mujhe lagtaa hai aane mein mujhse der huyee....... par dheere dheere faanslaa poora kar loonga..... aapki rachnaaon ka swaad chakh loonga....