Thursday, September 17, 2009

धागा है यह प्रेम का ,

नाज़ुक पर कमज़ोर नहीं !!

ऊंची-ऊंची हैं चट्टानें ,

पर झरना है - रुकता तो नहीं !!

उम्मीदों का दामन पकड़ा ,

हँसना है रोना तो नहीं !!

रोना ,गिरना ,थमना, रुकना ,

पड़ाव हैं ये ठहराव नहीं !!

जीवन हमको रोज़ सिखाता ,

परखता तो है पर दोस्त यही !!

2 comments:

दिगम्बर नासवा said...

PREM KE DHAGE SADA MAJBOOT HOTE HAIN ... SACH MEIN YE JHARNE RUKTE NAHI ..... BAHOOT KHOOBSOORAT KHYAAL MEIN BAANDHA HAI IN PANKTIYON KO ......

MUFLIS said...

jeevan-saar aur jeevan-darshan ko
qareeb se samjhaati hui ek nayaab rachnaa . . .

badhaaee
---MUFLIS---