Sunday, March 8, 2009

सुबह-सुबह क्या एहसास हुआ !!!!

हवा में कुछ अलग ही ताजगी थी

और उगते हुए सूरज में कुछ अलग ही चमक

सिन्दूरी से सुनहरी होता हुआ रंग

और उस पर हरियाले तोतों का आसमान पर झुंड में तैर जाना

पत्तों के हिलने का अंदाज़ हवा को आकार देता हुआ ,

सूरज की गर्मी भरी छुअन पाते ही फूलों का ऑंखें खोल देना

अकेले होने पर भी अकेलेपन की बजाये

इन सबका संग-साथ महसूस करना

प्रकृति ही सबसे प्यारा दोस्त

और सबसे असरदार मरहम है !!!

4 comments:

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया.
बहुत सुन्दर लिखती हैं आप.
होली की शुभकामनाएं

Lokendra said...

wah... achchha likha hai aapne..... Dosti waise bhi bahut anamol hai.... aur aapne prkrit ko bhi us khoobsoorati mai shamil kar use aur khoobsurat bana diya hai.........

MUFLIS said...

प्रकृति ही सबसे प्यारा दोस्त...
और सबसे असरदार मरहम है !!!

beshak ! is-se badaa aur sach bhalaa hoga bhi kyaa ??
fizaaoN ki paakeeza khoobsurti
shabd bn kr aapki nazm mei dhal gayi hai.....
mubarakbaad. . . .
---MUFLIS---

Yusuf Kirmani said...

आपके ब्लॉग पर पहली बार पहुंचा। प्रकृति पर अच्छी कविता है। लेकिन पोस्ट का अंतराल लंबा है। थोड़ा रचनाओं की पोस्टिंग का गैप करें। मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है।