Wednesday, April 15, 2009

कल रात ,

चाँद अकेला टहल रहा था आसमान में

कुछ धूमिल और अनमना सा

छितरे-बिखरे कुछ बादलों के पीछे

बार-बार झाँक कर देखता

पूछा तो बोला -

ढूंढते-ढूंढते थक गया हूँ

अपने दोस्तों-यारों ,

साथी सितारों को

बहुत चिढ़ाते हैं मुझे कभी-कभी ये सब मिलके !!

3 comments:

Meghna said...

its very nice..........

Shikha Deepak said...

सुंदर कल्पना। सुंदर भाव।

Lokendra said...

बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने...
दोस्ती की अभिव्यक्ति चाँद और सितारों की कल्पना से आप ने बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत किया है|