Sunday, January 11, 2009

पहाडों की दुपहर

और धूप के संग

वो लुका-छिपी का खेल !

मेरे पीछे आने पर

एक पहाड़ से दूसरे पर तेज़ी से दौड़ जाना

पेड़ों की टहनियों में से झांकना

पर हाथ न आना

और हवा में तैरते हुए

रोम-रोम में गर्माहट भर जाना !!

1 comment:

MUFLIS said...

mun ki komal umangoN aur akankshaaoN ki qudrat ke khoobsurat nzaaroN ke sath paavan.si athkheliyaaN...
ek bahot sundar rachnaa..!
badhaaee !!
---MUFLIS---