Wednesday, December 31, 2008

मेरे सभी ब्लॉग मित्रों को नव-वर्ष की हार्दिक शुभ-कामनाएं -


आओ लिखें कुछ बात नई


चलो करें शुरुआत नई


नई सुबह है, हवा है ताज़ी


भेजें कुछ खुशियों की पाती


पाषाण टूटे, झरने फूटे


कल-कल की है मधुर ध्वनि


रसिंगार है झूमे जाता


खिल जाने को मुझे बुलाता


चेह्कें पंछी, उड़ें तितलियाँ


जीवन-प्राण से भरी हैं कलियाँ


झाड़ के परतें पुरानी कई


फ़िर से करें इक कोशिश नई


5 comments:

मोहन वशिष्‍ठ said...

नया साल 2009 आप सभी के लिए
सुखदायक
धनवर्धक
स्‍वास्‍थ्‍वर्धक
मंगलमय
और प्रगतिशील हो

यही हमारी भगवान से प्रार्थना है

Regard

Kishore Choudhary said...

apne samarthakon ke liye jagah banayen , nav varsh ki shubhakaamanaye.

MUFLIS said...

"jhaarh ke parteiN purani kai,
phir se kareiN koshish ik nayi"
madhurim svar-lehriyoN meiN kal-kal
behti si ek khoobsurat nazm...
bahot hi achha aahvaan hai .
badhaaee !!
देहरादून से छपने वाली पत्रिका "सरस्वती-सुमन" का ग़ज़ल विशेषांक आया है .
आपकी पारखी नजरों से गुज़र जाए तो उसके वक़ार में इज़ाफा हो..
पता है : डॉ आनंद सुमन सिंह, मुख्या सम्पादक ,
सरस्वती सुमन , १-छिबर मार्ग , आर्य नगर , देहरादून .
फ़ोन : ०९४१२० ०९००० .

नवीन शर्मा said...

विमी जी आपके कामेन्ट्स का बहुत शुक्रिया...और नया साल आपके लिये बहुत सुनहरा रहे...
आदर सहित

विनय said...

बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है आपने, नये साल की शुभकामनाएँ


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गुलाबी कोंपलें